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कहानी (अधूरा कागज) वैभव बेख़बर

  चेहरे पर गहरी थकान, आँखों में बुझती उम्मीदें, और होठों पर एक मरा-मरा-सा मुस्कान का घूँघट लिये आरवी  जिंदगी के संघर्षों से जद्दोजहद करती हुई जीवन व्यतीत कर रही थी एक औरत, जिसे दुनिया ने बार-बार ठुकराया, और उसने हर बार खुद को समेट कर फिर से जीना सीखा, आरवी कानपुर से थी, नोयडा में एमिटी यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने आई थी, यहीं उसकी मुलाकात जतिन से हुई, दोनों क्लासमेट थे और अच्छे दोस्त भी थे, आगे चलकर ये दोस्ती प्रेम में तब्दील हो गयी, दोनों क्लास में अच्छे स्टूडेंट्स थे हमेशा एक दूसरे का सहयोग करते थे, सारा कॉलेज इनकी दोस्ती और इंटेलिजेंस की तारीफ़ करता था जतिन सूरत का रहने वाला था, इंजीनियरिंग की पढ़ाई के अंतिम वर्ष कैंपस प्लेशमेंट के लिये पाँच रेपोटेड कम्पनियाँ आईं थी, आरवी और जतिन दोनों का अच्छे पैकेज पर सलेक्शन हुआ था, लेकिन दोनों की आपसी सहमति से , उन्होंने ऐसी कम्पनी को चुना जिसने उन्हें एक ही शहर में जॉब करने का मौका दिया, दोनों मुम्बई शिफ्ट हो गये थे, आरवी और जतिन को अपने प्रेम का अंजाम सोचने का वक़्त आ गया था, क्योंकि आरवी के पापा आरवी की शादी के लिये सोच रह...

कहानी (पुनीत पटेल)

 वही ट्रैन वही ऐ. सी. कोच मगर आज की यात्रा में  अथाह बेचैनी है  मैं नौकरी से रिटायर होकर अपने पैतृक गाँव जा रहा हूँ  वैसे तो मैं साल में एक-आध बार गाँव आता रहा हूँ किसी त्योहार या किसी आयोजन में छुट्टियाँ लेकर,मगर आज मैं सैदव के लिये अपने जीवन के बचे कुचे दिन अपने खेत-खलिहानों गाँव में बिताने अपने गाँव लौट रहा हूँ ख़यालों की एक आँधी  मन से गुज़र रही है नये-पुराने विचार मन में उमड़ रहे हैं नौकरी में बिताये लगभग 30 वर्ष  के सारे ख़याल एक चक्रवात की तरह  मन में उमड़ रहे हैं आज मेरा गाँव मुझे इस तरह आकर्षित कर रहा है कि जैसे युवा अवस्था में ग्रेजुएशन के दौरान दिमाक में नौकरी पाने के लिये लालायित रहते थे रात के लगभग 11 बज चुके थे  सामने वाली बर्थ  के सभी लोग सो रहे थे, मैं अपने मन के उमड़ते ख्यालों को विराम देना चाहता था मैंने बोतल निकाल कर पानी पिया और सोचा बाथरूम करके अब सो जाऊँगा मैं बाथरूम होकर लौट आया पूरे कोच में ख़ामोशी थी सब लोग ही सो रहे थे आवाज सिर्फ ट्रेन के चलने की रफ़्तार की आ रही थी मैं अपनी बर्थ पर लेट गया और आँख बंद करके सोने की कोशिश करने...